पुलिस की गिरफ्त में आरोपी -डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा, डॉ. प्रीति आहूजा, शिवम अग्रवाल, राजेश कुमार, राम प्रकाश कुशवाहा, नरेंद्र सिंह, कुलदीप सिंह, राजेश तोमर, परवेज सैफी और रोहित तिवारी
Kanpur News : कानपुर पुलिस किडनी रैकेट से जुड़े सभी पहलुओं और तारों को जोड़ने के उद्देश्य से उन सभी नर्सिंग होमों की विस्तृत जानकारी एकत्र कर रही है, जहाँ पिछले तीन वर्षों में रोगियों की मृत्यु होने पर विवाद और हंगामा हुआ था। पुलिस को संदेह है कि इन अस्पतालों में गुपचुप तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट किए जा रहे थे, इसलिए पुलिस गहन छानबीन कर रही है।
कानपुर शहर में बीते तीन वर्षों के दौरान कल्याणपुर, काकादेव, रावतपुर और पनकी इलाके में स्थित ऐसे नर्सिंगहोम की पूरी जानकारी इकट्ठा की जा रही है, जहाँ पर किसी बात को लेकर विवाद और हंगामा हुआ था। पुलिस इस बात का पता लगा रही है कि उन नर्सिंगहोम में किन मरीजों की जान गई थी। पुलिस को संदेह है कि मरने वाले कुछ मरीज किडनी देने वाले (डोनर) या किडनी प्राप्त करने वाले (रिसीवर) हो सकते हैं। यह आशंका आरोपियों से पूछताछ करने पर सामने आई जानकारियों के आधार पर है। पुलिस पहले के नर्सिंगहोम मालिकों से भी इस मामले में पूछताछ कर सकती है।
केशवपुरम, मसवानपुर, रावतपुर, पनकी, सचेंडी, और काकादेव जैसे इलाकों में स्थित कई नर्सिंगहोम में दुर्भाग्यवश मरीजों की जानें गई हैं। ऐसी घटनाओं के बाद, मृतकों के परिवार वालों ने आक्रोश में आकर विरोध प्रदर्शन किया था, जिसके परिणामस्वरूप पुलिस को हस्तक्षेप करके स्थिति को नियंत्रण में लाना पड़ा। कुछ नर्सिंगहोम के खिलाफ अनियमितताओं और लापरवाही के आरोपों के चलते कार्रवाई भी की गई थी, जिसके अंतर्गत उन्हें सील कर दिया गया था। हालांकि, यह भी देखा गया कि कुछ महीने बीतने के बाद, उनमें से कुछ नर्सिंगहोम फिर से अपना कामकाज शुरू कर दिया था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शहर में वर्ष 2023 से अवैध रूप से किडनी ट्रांसप्लांट किए जाने की सूचना मिली है, जिसकी जांच जारी है।
कुछ नर्सिंग होम की तरफ ध्यान दिलाया गया था, लेकिन दुर्भाग्यवश वे अब बंद हो चुके हैं।
कुछ नर्सिंगहोम की ओर ध्यान दिलाया गया, लेकिन वे नर्सिंगहोम अब संचालन में नहीं हैं, यानी बंद हो चुके हैं। आशंका जताई जा रही है कि यह शल्य चिकित्सा कल्याणपुर, काकादेव, रावतपुर और पनकी इलाके में हुई होगी। हालाँकि, अभी तक इसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हो पाई है। जेल भेजे गए शिवम अग्रवाल, परवेज सैफी और रोहित तिवारी ने कुछ नर्सिंगहोम के बारे में जानकारी दी है, लेकिन दुर्भाग्यवश वे सभी नर्सिंगहोम अब बंद हो चुके हैं। संभवतः उनकी जगह पर अब दूसरे नर्सिंगहोम चल रहे हैं, या फिर उन नर्सिंगहोम के संचालक बदल गए हैं। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आहूजा हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया की जाती थी।
किडनी दान करने वालों (डोनर) और किडनी की बीमारी से जूझ रहे रोगियों से संबंधित सूचना एकत्र की जा रही है। पहले, किडनी रोगी और डोनर दोनों को अलग-अलग अस्पतालों में रखा जाता था। अस्पतालों में मौजूद पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य कर्मचारियों को मरीज के गालब्लाडर (पित्ताशय), पेट में गांठ, हार्निया जैसी समस्याओं के बारे में बताया जाता था। केवल कुछ विशेष पैरामेडिकल स्टाफ ही मरीज की देखभाल करते थे और उनकी दवाओं का पूरा हिसाब रखते थे। वर्ष 2023 से, ऐसे डोनर और किडनी रोगियों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए, इन इलाकों के नर्सिंग होम से सूचना जुटाई जा रही है।
पिछले तीन सालों में कल्याणपुर, रावतपुर, पनकी, और काकादेव के उन सभी नर्सिंग होम के बारे में जानकारी एकत्र की जा रही है, जहाँ पर विवाद हुए थे। इन नर्सिंग होम में मरने वाले लोगों का विस्तृत विवरण तैयार किया जा रहा है। डीसीपी पश्चिम, एसएम कासिम आबिदी के अनुसार, इस जानकारी से कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
रोहित तिवारी ने शिवम अग्रवाल के विषय में जानकारी दी।
रोहित ने बताया कि ये डोनर अलग-अलग शहरों से थे, जिन्हें दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में लाया गया था। नवीन पांडेय की गिरफ्तारी से शहर के दूसरे नर्सिंग होम में किये गए किडनी ट्रांसप्लांट के बारे में भी जानकारी मिल सकती है। रोहित तिवारी ने हरदोई के बिलग्राम के रहने वाले शिवम अग्रवाल के बारे में खुलासा किया है। रोहित के अनुसार, शिवम अग्रवाल ही ट्रांसप्लांट के लिए आवश्यक दवाएं, इंजेक्शन और दूसरे उपकरण लाता था।
पुलिस शिवम और रोहित को हिरासत में लेकर पूछताछ करेगी। मुदस्सर अली सिद्दीकी सर्जरी को अंजाम देता था, जबकि कुलदीप सिंह राघव और राजेश तोमर एनेस्थीसिया देने का काम करते थे। पुलिस की टीमें शिवम यादव की खोज में हरदोई और नवीन पांडेय की तलाश में प्रयागराज के लिए रवाना हो चुकी हैं। पुलिस अब शिवम अग्रवाल और रोहित तिवारी को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर आगे की पूछताछ करेगी।
अब तक इस मामले में 10 आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। यह मामला अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट करने से जुड़ा हुआ है, जिसमें कई लोगों की संलिप्तता पाई गई है। जिन व्यक्तियों को अब तक गिरफ्तार करके जेल भेजा गया है, उनके नाम इस प्रकार हैं: डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा, डॉ. प्रीति आहूजा, शिवम अग्रवाल, राजेश कुमार, राम प्रकाश कुशवाहा, नरेंद्र सिंह, कुलदीप सिंह, राजेश तोमर, परवेज सैफी और रोहित तिवारी। पुलिस अभी भी कुछ और लोगों की तलाश कर रही है, जिनमें डॉ. वैभव, डॉ. अफजल, मुदस्सर अली सिद्दीकी, डॉ. अमित, नवीन पांडेय, शिवम यादव और लखनऊ के कुछ अन्य डॉक्टरों के नाम शामिल हैं। इन सभी पर किडनी ट्रांसप्लांट में अवैध गतिविधियों में शामिल होने का संदेह है और पुलिस इनकी गिरफ्तारी के लिए प्रयासरत है।
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